मोदी की रैली के लिए दो पेट्रोल पंप संचालकों ने तेल उधार देने से किया साफ इनकार

 





जिला प्रशासन ने डीएसओ को लिखा खत, दोनों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश


सन्तोष खाचरियावास

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अजमेर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अजमेर में 28 फरवरी को प्रस्तावित आमसभा की तैयारियों में जुटे जिला प्रशासन को तगड़ा झटका लगा है। अजमेर शहर के दो पेट्रोल पंप संचालकों ने पीएम की यात्रा की तैयारियों में दौड़ भाग कर रहे अफसरों की गाड़ियों में उधार तेल देने से स्पष्ट मना कर दिया है। इससे जिला प्रशासन की जबरदस्त किरकिरी हो रही है। अब जिला प्रशासन ने जिला रसद अधिकारी को पत्र लिखकर दोनों पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने और तेल देने के लिए  करने की हिदायत दी है। 

मालूम हो कि राज्य सरकार के निर्देश पर गत दिनों पूरे राज्य में जिला रसद अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों में संचालित पेट्रोल पंपों के संचालकों को पीएम की आमसभा के मद्देनजर भाजपा कार्यकर्ताओं एवं लाभार्थियों के वाहनों में कूपन के आधार पर उधार में पेट्रोल डीजल भरने के लिए पाबंद किया। इसी कड़ी में अजमेर में जिला रसद अधिकारी प्रथम मोनिका जाखड़ ने सोमवार को ही सभी पेट्रोल पंप संचालकों को पाबंद किया लेकिन अगले ही दिन उनके इस आदेश की हवा निकल गई।



तैयारियों में दौड़ रही अफसरों की गाड़ियां


अजमेर की कायड़ विश्राम में प्रधानमंत्री की आमसभा की तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं। आए दिन कभी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तो कभी डिप्टी सीएम दियाकुमारी सहित मंत्रियों और आलाअफसरों के दौरे हो रहे हैं। अजमेर का पूरा जिला प्रशासन उनकी आवभगत में जुटा है। व्यवस्थाओं में लगे अफसरों की गाड़ियां तेल भरवाने के लिए अजमेर में भारत पेट्रोलियम के पेट्रोल पंप वकील एंड कम्पनी और एचपीसीएल के पेट्रोल पंप अजमेर ऑटो पर पहुंची तो दोनों के संचालकों ने उधारी में तेल भरने से साफ मना कर दिया। बात जिला कलेक्टर तक पहुंची। उनके निर्देश पर अतिरिक्त जिला कलेक्टर पूल ने डीएसओ इन दोनों पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।




क्या कर सकता है जिला प्रशासन ?


यहां गौरतलब है कि कचहरी रोड स्थित अजमेर ऑटो पेट्रोल पंप से भाजपा के ही एक वरिष्ठ नेता की साझेदारी बताई जा रही है और उसी पेट्रोल पंप पर उनकी ही पार्टी के प्रधानमंत्री की आमसभा के लिए पेट्रोल डीजल देने से मना किया जा रहा है। ऐसे में जिला प्रशासन एवं जिला रसद अधिकारी इस पंप संचालक के खिलाफ क्या कदम उठाएंगे, यह देखना दिलचस्प होगा। अगर उनकी देखादेखी राज्यभर में दूसरे पेट्रोल पंप संचालकों ने भी उधारी में पेट्रोल डीजल देने से मना कर दिया तो पीएम मोदी की आमसभा में भीड़ लाने की मशक्कत मुश्किल में पड़ सकती है।


हास्यास्पद स्थिति


कुछ समय पहले अजमेर में पटेल मैदान के सामने स्थित बजरंग पेट्रोल पंप के संचालक ने अपने फायदे के लिए एक डिस्पोजल यूनिट सड़क किनारे लगा ली थी तो तत्कालीन डीएसओ हेमंत आर्य ने उस डीयू मशीन को सीज कर दिया था। कुछ माह बाद उसी तरह ब्यावर रोड स्थित अनिल सर्विस सेंटर पर एचपीसीएल ने अपने फायदे के लिए सड़क किनारे डीयू मशीन लगाकर करीब दो महीने तक पेट्रोल बेचा और आमजन की जान जोखिम में डाल रखी थी।तब डीएसओ से शिकायत की गई तो तत्कालीन डीएसओ नीरज जैन ने यह जवाब देकर पल्ला झाड़ लिया था कि पेट्रोल पंप उनके क्षेत्राधिकार में नहीं आते हैं। 
ऐसे में सवाल उठता है कि उधार में तेल लेने के लिए डीएसओ किस अधिकार से पेट्रोल पंप संचालकों को पाबंद करते हैं। वाकई है ना हास्यास्पद स्थिति।





सैकड़ों बसें-हजारों कार-जीपें आने का अनुमान

इस बार अजमेर में हो रही पीएम मोदी की आमसभा में पूरे प्रदेश से भाजपा कार्यकर्ताओं को लाने के लिए सैकड़ों बसें आरटीओ के जरिए 'बुक' की रही हैं। इनके अलावा हजारों कारों-जीपों के जरिए कार्यकर्ता और लाभार्थी यशस्वी प्रधानमंत्री को सुनने अजमेर आएंगे। कुल दो लाख लोगों को बुलाने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य के सभी पेट्रोल पंप संचालकों को पेट्रोल डीजल का अतिरिक्त स्टॉक रिजर्व रखने के निर्देश दिए गए हैं।

 यह है व्यवस्था

लोकसभा-विधानसभा चुनावों की तर्ज पर प्रधानमंत्री रैली के लिए इस बार भी जिला प्रशासन वाहनों में पेट्रोल डीजल मुफ्त भरने के लिए कूपन जारी करेगा। ये कूपन कार्यकर्ताओं में वितरित किए जाएंगे। उनके शहर की अजमेर से दूरी और वाहन बस है या कोई अन्य, इस आधार पर पेट्रोल डीजल के कूपन दिल खोलकर दिए जाएंगे। 

 पेट्रोल पंप संचालकों को पाबंद किया जाता है कि वे कूपन में लिखी मात्रा के अनुसार तेल उनके वाहन में मुफ्त भरेंगे। इसके बाद जिला परिवहन कार्यालय में अपना बिल पेश करके भुगतान प्राप्त कर सकेंगे।

यह है पेट्रोल पंप मालिकों की दिक्कत

 अपना भुगतान लेने के लिए पेट्रोल पंप संचालकों को बड़ी परेशानी उठानी पड़ती है। पूर्व में प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जयपुर में हुई रैली तथा मुख्यमंत्री भजनलाल की नागौर में हुई रैली के कई बिल अब भी लंबित पड़े हैं। ऐसे में पेट्रोल पंप संचालकों के लाखों रुपए जिला प्रशासन में अटके हुए हैं। अपना पैसा पाने के लिए उन्हें अफसरों की मिन्नतें करनी पड़ रही है। खास बात यह भी है कि पंप संचालक अपनी कम्पनी को नकद भुगतान देकर पेट्रोल डीजल खरीदते हैं। भुगतान में देरी होने पर कम्पनी पंप संचालकों से 18 प्रतिशत ब्याज वसूलती है, दूसरी तरफ जिला प्रशासन उधारी में खरीदे गए पेट्रोल डीजल के बदले ब्याज नहीं देता। यह भी तय नहीं होता कि भुगतान कितने दिनों में करेगा। हर बार महीनों लग जाते हैं। 

बस मालिकों ने भी दिखाई आंख

लगता है मोदी की आमसभा की तैयारियों को किसी की नजर लग गई है। इनदिनों प्राइवेट बस ऑपरेटरों ने चक्का जाम हड़ताल कर रखी है और पीएम की आमसभा के लिए अपनी बसें देने से इनकार कर दिया है। इसके लिए अब जिला परिवहन अधिकारियों को अपना 'रूतबा' दिखाना होगा। उधर, जिला परिवहन अधिकारियों ने निजी स्कूल बसों को भी अधिग्रहीत करने की कवायद शुरू कर दी है।


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