अनीति की राह : मोदी सरकार पर साल 2026 भारी, दो बड़ी मुसीबतों में फंसी बीजेपी

 



 शंकराचार्य विवाद और यूजीसी कानून को लेकर देशभर में भाजपा के खिलाफ माहौल


सन्तोष खाचरियावास

मोदी सरकार पर साल 2026 भारी पड़ता नजर आ रहा है। माघ मेले की मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान ने जहां सनातनियों को योगी सरकार की तानाशाही के विरुद्ध एकजुट कर दिया है, वही अब यूजीसी इक्वलिटी कानून ने भाजपा के परंपरागत वोट को तगड़ा झटका दे दिया है।


 ब्राह्मण, वैश्य, क्षत्रिय, कायस्थ जैसे तमाम सामान्य वर्ग के लोग इस कानून के खिलाफ एकजुट होकर केन्द्र की भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा करने लगे हैं। देश के कई हिस्सों में यूजीसी इक्वलिटी कानून का जमकर विरोध हो रहा है। सामान्य वर्ग के लोग भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने जैसे नारे लगा रहे हैं। सनातन और सामान्य वर्ग, इन दो पायदानों के सहारे सत्ता की मुंडेर तक पहुंचने वाली भाजपा ने अब अपनों का ही विश्वास खो दिया है। सनातनियों और सामान्य वर्ग के वोट बैंक को फिर से साधना अब भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। 

केन्द्र की मोदी सरकार ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक गोदी मीडिया को मैनेज कर रखा है, इस कारण अखबारों और टीवी चैनलों पर यूजीसी इक्वलिटी कानून की खिलाफत की खबरें नहीं आ रही हैं, जबकि सोशल मीडिया पर मोदी सरकार की जमकर छिछालेदारी हो रही है।

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यह है मामला


जनवरी 2026 में यूजीसी ने "उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026" अधिसूचित किए, जो 15 जनवरी 2026 से लागू हो गए। ये नियम 2012 के पुराने भेदभाव-रोधी नियमों की जगह लेते हैं। मुख्य बदलाव जाति, जेंडर, धर्म या पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव रोकने के लिए हैं। हर संस्थान में अनिवार्य रूप से इक्विटी कमिटी और समान अवसर केंद्र (EOC) बनाना होगा। भेदभाव की शिकायत पर जांच और सजा के प्रावधान सख्त किए गए हैं, जैसे जुर्माना, निलंबन या डिग्री रद्द करना। उद्देश्य एससी, एसटी, ओबीसी और अन्य वंचित वर्गों को सुरक्षा देना है।


 इस नियम के लागू होने के बाद से ही पूरे देश में विरोध प्रर्दशन देखने को मिल रहा है। सामान्य वर्ग के लोगों ने इस नियम पर अपनी चिंता जताते हुए, इस वापस लेने की मांग की है। वहीं सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है। देश के कई राज्यों में मोदी सरकार के खिलाफ उग्र प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग अपने घरों पर लगे बीजेपी के झंडे उतारकर फेंक रहे हैं। कई ब्राह्मण आचार्य, धर्मगुरु, सामाजिक संगठनों के अगुवा, पंच पटेल आदि इस यूजीसी इक्वलिटी कानून को सामान्य वर्ग के साथ भाजपा का सबसे बड़ा धोखा बताते हुए विरोध पर उतर आए हैं।


क्या बला है यूजीसी


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC ) भारत सरकार की एक वैधानिक संस्था है, जिसकी स्थापना यूजीसी अधिनियम, 1956 के तहत हुई थी। यह उच्च शिक्षा के मानकों को बनाए रखने, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अनुदान देने तथा शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का काम करती है। 
यूजीसी देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए नियम बनाती है, जैसे शिक्षकों की नियुक्ति, प्रमोशन, पाठ्यक्रम और छात्रों के लिए दिशानिर्देश। यह अलग बात है कि सत्ता के चहेते विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सरकारी धन की जमकर बंदरबांट और नियमों से खिलवाड़ की तरफ यूजीसी ने आंखें मूंद रखी हैं। अब यूजीसी ने सामान्य वर्ग और आरक्षित वर्ग के बीच बड़ी लकीर खींचकर केन्द्र की मोदी सरकार को मुश्किल में डाल दिया है।

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मेरठ में ब्राह्मण समाज का विरोध

 युवा ब्राह्मण समाज संगठन (ट्रस्ट), मेरठ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रस्तावित “उच्च शिक्षा संस्थानों में समाज संबंधी विवेचन–2026” के मसौदे पर आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि इस मसौदे में सामाजिक संरचनाओं को एकतरफा दिखाया गया है, जिससे कुछ समुदायों की नकारात्मक छवि बन सकती है।


BJP नेता ने दिया इस्तीफा

 उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में भाजपा नेता और पूर्व विस्तारक मृगेंद्र उपाध्याय ने यूजीसी के नए नियमों का विरोध करते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि ये नियम ब्राह्मण समाज और सामान्य वर्ग के खिलाफ हैं।


बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने भी दिया इस्तीफा


शंकराचार्य के अपमान और यूजीसी के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है।


मुजफ्फरनगर में स्वर्ण समाज का विरोध

रविवार को पश्चिम उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में स्वर्ण समाज के कई संगठनों ने यूजीसी कानून के विरोध में प्रदर्शन किया। शहर के तुलसी पार्क में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और धरना देकर सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान त्यागी भूमिहार ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मांगेराम त्यागी ने सरकार को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर यह कानून वापस नहीं लिया गया तो स्वर्ण समाज के लोग सड़कों पर उतरेंगे, रेलवे लाइन रोकेंगे और विरोध तेज करेंगे।


मांगेराम त्यागी ने यह भी कहा कि स्वर्ण समाज चाहता था कि योगी आदित्यनाथ दोबारा मुख्यमंत्री बनें, लेकिन यूजीसी एक्ट के कारण भाजपा की लोकप्रियता कम हो रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे पहले से ही एससी-एसटी एक्ट को झेल रहे हैं और अब यूजीसी एक्ट लागू किया जाना उनके लिए स्वीकार नहीं है।



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