शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने प्राइवेट स्कूलों की नस दबाई लेकिन दर्द नहीं दे पाएंगे

 


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संतोष खाचरियावास

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राजस्थान के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में बच्चे अब एकसी यूनिफॉर्म में नजर आएंगे...न उनके बीच 'अमीरों के स्कूल-गरीबों के स्कूल' वाला भेदभाव होगा न गले में टाई होगी। सब मिलकर राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत गाएंगे। अगर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का यह सपना सच हो गया तो राजस्थान में समानता और समाजवाद की नई पौध तैयार होने लगेगी

मगर ऐसा होना जाना कुछ है नहीं। यह उतना ही मुश्किल है जितना किसी कुत्ते की पूछ को सीधा करना। आप सभी जानते हैं कि निजी स्कूलों की पूछ कैसी है!

 हमारे राष्ट्रवादी क्रांतिकारी शिक्षा मंत्री इस बार प्राइवेट स्कूलों की ऐसी नस दबाने जा रहे हैं कि उनका बिलबिलाना और फिर से कोर्ट जाना तय है।


सब जानते हैं कि निजी स्कूलों के पास अपनी ब्रांडिंग और मार्केटिंग का सबसे अहम हथियार उनकी स्पेशल यूनिफॉर्म ही है। *बच्चे इसी 'रैपर' को देखकर मचलते हैं।*

 पेरेंट्स भी अपनी सन्तान को इसी यूनिफॉर्म में देखने के लिए प्राइवेट स्कूलों के आगे नाक रगड़ने से लेकर बरसों तक हंसते-हंसते जेब कटाने का बॉन्ड भरते हैं।

 

शिक्षा मंत्री यह तो जानते ही होंगे कि प्राइवेट स्कूलों में फीस और स्टेशनरी बिक्री के साथ साथ यूनिफॉर्म से भी तगड़ा कलेक्शन होता है। एक ही क्लास में डे वाइज अलग अलग यूनिफॉर्म, हाउस वाइज भी अलग अलग। विंटर की अलग और समर की अलग। बच्चों का एक कबर्ड तो उनकी फैंसी यूनिफॉर्म से भरा रहता है। प्राइवेट स्कूलों के भरोसे ही बड़े पैमाने पर यूनिफॉर्म इंडस्ट्री

 चल रही है। ऐसे में इस आदेश को लागू कराने में भजनलाल सरकार को पसीना आने वाला है। 

सब जानते हैं कि मनमानी फीस वसूली पर तो सरकार अब तक 


नकेल नहीं कस पाई है... न तेज सर्दी में छुट्टी करा पाई न तेज गर्मी में। भारी बारिश में स्कूलों की छुट्टी का कलक्टरों का आदेश तक इन स्कूलों में नहीं माना जाता है। फीस वसूली से लेकर टीसी काटने तक में इन प्राइवेट स्कूल वालों के वीटो को कोई चुनौती नहीं दे सका है तो मंत्रीजी कौन होते हैं। 


बात-बात पर हाईकोर्ट जाने वाले इन स्कूलों के पास महंगे वकील हैं, जो सरकार और उसके आदेश को कटघरे में खड़ा करने में देर नहीं करते। वहां से मुंह की खाने के बाद सरकार चुपचाप अपना आदेश वापस ले लेती है.. पहले भी ऐसा हो चुका है। 


निजी स्कूलों में ज्यादातर मिशनरी स्कूल हैं जिनमें कई अफसरों के बच्चे भी पढ़ते हैं। ये अफसर सरकारी स्कूलों में तो सरकार की मंशा मुताबिक आदेश लागू करा देते हैं लेकिन प्राइवेट स्कूलों से सरकार की बात मनवाना इनके बूते की बात नहीं है। अब देखना यह है कि शिक्षा मंत्री जी सरकारी स्कूलों के बच्चों जैसी यूनिफॉर्म प्राइवेट स्कूलों के बच्चों को भी पहना पाते हैं या नहीं।

 वैसे बात वो ही करनी चाहिए तो अपने से हो सके...केवल मीडिया की सुर्खियां बटोरने और अटेंशन पाने के लिए घोषणा करना ही काफी नहीं है!!!!

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