महाकुंभ में खोए थे 48,500 लोग, सबके सब वापस मिले
किसी की पत्नी खोई, तो किसी का बेटा
आखिरी स्नान पर्व के दौरान भी भूले भटके केंद्र में अपनों से बिछुड़ जाने वालों की भीड़ रही। 24 परगना, बंगाल से आए संजय महापात्रा की पत्नी खो गई। संजय ने कुछ देर तो उनको संगम घाट पर तलाशा लेकिन, वह नहीं मिलीं। रोते-बिलखते संजय नंगे बदन ही भारत सेवा केंद्र पहुंचे। आंखों में आंसू भरकर संजय शिविर संचालकों से गुहार लगाने रहे। कई घंटे तक वहां शिविर के बाहर ही खड़े रहे।
अलीगढ़ से आईं चंदा का नौ साल का बेटा विशाल भी संगम में स्नान के बाद घाट पर ही गुम हो गया। इकलौता बेटे के लापता होते ही चंदा बदहवास हो उठीं। काफी देर तक वह उसे संगम के आसपास तलाशती रहीं। किसी तरह भटकती हुईं वह भारत सेवा केंद्र पहुंची।
यहां करीब तीन घंटे बाद पुलिस वालों ने उद्घोषणा सुनकर बच्चे को वहां पहुंचाया। बच्चे को देखते ही मां चंदा ने उसे सीने से लगा लिया। काफी देर तक अपने बेटे से लिपटकर रोती रही। इसी तरह पूरे दिन ही यहां बिछुड़ने और मिलने वालों का तांता लगा रहा।





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