अजमेर दरगाह में शिव मंदिर होने का दावा कोर्ट में सुनवाई के लिए स्वीकार
अजमेर ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह के पहले शिव मंदिर होने के दावा मामले में कोर्ट का बड़ा आदेश आया है। सिविल कोर्ट (वेस्ट) ने ऐसा दावा करती याचिका को स्वीकार कर लिया है। यानि कोर्ट ने इस केस को सुनवाई लायक मान लिया है। इस मामले में दरगाह का ASI सर्वे कराए जाने की मांग की गई है, ताकि सबूत जुटाकर पता लगाया जा सके कि अजमेर दरगाह पहले शिव मंदिर थी। कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के बाद अजमेर दरगाह कमेटी, अल्पसंख्यक विभाग और एएसआई को नोटिस के निर्देश जारी किए।
दरअसल, अजमेर ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह को संकट मोचन शिव मंदिर होने का दावा मामले में आज अजमेर सिविल कोर्ट वेस्ट में बहस की गई. कोर्ट में बहस के दौरान भगवान शिव के बाल स्वरूप की तरफ से वकील रामस्वरूप बिश्नोई ओर ईश्वर सिंह ने बहस की। इसमें कहा गया कि दरगाह से पहले यहां शिव मंदिर था, जिसके कई साक्ष्य दस्तावेज के रूप में कोर्ट के सामने पेश किए गए।
कोर्ट के आदेश के अनुसार, अजमेर दरगाह कमेटी, अल्पसंख्यक विभाग और एएसआई को नोटिस जारी किए जाएंगे।
मालूम हो कि यह दावा दिल्ली निवासी हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने वकील रामनिवास बिश्नोई और ईश्वर सिंह के मार्फत कोर्ट में दायर किया था। इसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकी भी मिल चुकी है।
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