99 हजार करोड़ रुपए की बचत किसके खाते में गई ? जनता हैरान
नई दिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का दावा है कि पेट्रोल और डीजल में एथनॉल मिलाकर भारत सरकार ने 99 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा बचाए हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि यह राशि किसकी जेब में गई? न तो पेट्रोल डीजल सस्ता हुआ और न ही जनता को इस बचत में से सब्सिडी दी गई। उल्टा लोगों के वाहनों के इंजन में खराबी और फ्यूल टैंक में पानी भरने की समस्या खड़ी हो गई। 80 फीसदी वाहन चालकों को नियमित रूप से अपने फ्यूल टैंक की सफाई करानी पड़ रही है।
भारत सरकार का दावा है कि एथनॉल मिक्सिंग प्रोग्राम की मदद से 17.3 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल का कम इस्तेमाल किया गया। साथ ही 51.9 मिलियन टन कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन भी कम हुआ है। पुरी ने एथनॉल मिक्सिंग प्रोग्राम को सफल बताते हुए इसका ज्यादा से ज्यादा उत्पादन एवं प्रयोग बढ़ाने की मंजूरी भी दी है।
पुरी के इस दावे के साथ बडा सवाल यह उठ खडा हुआ है कि केन्द्र सरकार ने जो 99 हजार करोड रुपए बचा लेने के आंकडे दर्शाकर बचत करने का शिगूफा छोड रही है असल में यह उसकी कमाई है जो आम जनता की जेब कतर कर जमा की गई है। मोदी सरकार की नीति से तेल कंपनियां तो मुनाफे में गोते लगा रही है, वहीं आम आदमी की आंखे पेट्रोल और डीजल सस्ता होने के इंतजार में पथरा गई हैं।
पेट्रोलियम कम्पनियों और सरकार की बल्ले बल्ले
असल बात यह है कि पेट्रोल पंपों के जरिए सरकार पेट्रोल के नाम पर खुद मिक्सिंग कर रही है। पेट्रोल के नाम पर एथेनाल मिक्स कर बेचा जा रहा है। लेकिन दाम प्योर पेट्रोल के वसूले जा रहे हैं। जबकि एथनोल पेट्रोल से काफी सस्ता है। ऐसे में 50 से 60 रुपए प्रति लीटर का एथनोल पेट्रोल में मिक्स करने से उसे प्रति लीटर 15 प्रतिशत पेट्रोल की बचत हो रही है और बदले में ग्राहकों को पेट्रोल की जगह एथनोल भरा जा रहा है। मुनाफा कमाने के चक्कर में मोदी सरकार उपभोक्ता संरक्षण कानून की धज्जियां उडा रही है। पेट्रोल में एथनोल मिश्रण किए जाने से पेट्रोल संचालित दुपहिया एव अन्य वाहनों में पानी बनने की समस्याओं को लेकर पेट्रोल पंपों आने दिन होने वाले विवादों पर पर्दा डालकर यह गोरखधंधा बदस्तूर जारी है।
सरकार इस तरह की लूटखसोट जारी रखेगी इस बात को पुरी के इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन बायोएनर्जी में संबोधन के दौरान किए गए इस दावे से भी बल मिलता है कि 15 फीसदी एथनॉल मिक्सिंग का लक्ष्य हासिल हो चुका है। इतना ही नहीं बल्कि साल 2014 के बाद से एथनॉल मिक्सिंग प्रोग्राम की मदद से केन्द्र ने विदेशी मुद्रा में 99,014 करोड़ रुपए की बचत की है। सरकार की मंशा एथनॉल सप्लाई वर्ष 2025-26 तक 20 फीसदी तक ले जाना है। ऑटोमोटिव ईंधन में एथनॉल के बढ़ते उपयोग ने 2014 के बाद से देश ने 17.3 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल का एक ऑप्शन दिया है, यदि एथनॉल मिक्सिंग प्रोग्राम नहीं चल रहा होता तो हमें इतना कच्चा तेल मंगाना पड़ता।
पेट्रोलियम मंत्री ने कहा- कार्बन उत्सर्जन में भी आई कमी
उन्होंने कहा कि एथनॉल मिक्सिंग प्रोग्राम ने पिछले एक दशक में कार्बन उत्सर्जन में भी 51.9 मिलियन मीट्रिक टन की कमी की है। यह आंकड़े 14 जुलाई 2024 तक के हैं। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने साल 2014 के बाद से डिस्टिलर्स को 1.45 ट्रिलियन रुपए का पेमेंट किया है जबकि किसानों को लगभग 87,558 करोड़ रुपये. पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि ई20 पेट्रोल (20 फीसदी एथनॉल मिक्स्ड पेट्रोल) अब देश में 15,600 से ज्यादा पेट्रोल पंप उपलब्ध है. केंद्र सरकार ने मार्च में ई100 ईंधन (E100 Fuel) भी लॉन्च किया था। इसमें 5 फीसदी पेट्रोल और 1.5 फीसदी को सॉल्वेंट और 93-93.5 फीसदी एथनॉल शामिल है। यह अपनी हाई ऑक्टेन रेटिंग के साथ हाई परफॉरमेंस इंजन के लिए बेहतरीन है। इससे इंजन की ताकत बढ़ती है।



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